बुधवार, 6 जनवरी 2016

जीरो बजट प्राकृतिक (आध्यात्मिक) खेती - पद्मश्री कृषी ऋषी श्री सुभाष पालेकर

जीरो बजट प्राकृतिक (आध्यात्मिक) खेती - MP3
इस खेती के कुछ विशेष मुद्दे:
  • यह प्रकृति, विज्ञान, आध्यात्म एवं अहिंसा आधारित शाश्वत कृषि पध्दती है ।
  • इस पध्दती में आपको रासायनिक खाद, गोबर खाद, जैविक खाद, केचुआ खाद एवं जहरीले रासायनिक-जैविक कीटनाशक एैसे कौनसे भी उर्वरक खरीदना नही । केवल एक देसी गाय से ३० एकड़ खेती कर सकते हो - चाहे वो सिंचित हो या असिंचित !
  • इस कृषि पध्दतीनुसार आपको केवल १०% पानी एवं १०% बिजली की आवश्यकता है; इसका मतलब ९०% पानी एवं बिजली की बचत !
  • इस प्राकृतिक खेती में उत्पादन रासायनिक एवं जैविक खेती से बिल्कुल कम नही मिलेगा, बल्की ज्यादा ही मिलेगा ।
  • उत्पादित माल पूर्णतः जहर मुक्त, पोषक, उच्च गुणवत्ता और स्वाद होने से उपभोक्ताओंकी ज्यादा मांग से दाम भी अच्छा मिलता है ।
  • एैसी खेती करनेवाले एक भी किसानने आत्महत्या नही की क्यूंकि उसका लागत मूल्य शून्य है ।
  • रासायनिक एवं जैविक खेती से मानव, पशु, पंछी, पानी, पर्यावरण का विनाश होता है । परंतु जीरो बजट प्राकृतिक खेतीसे इन सबका विनाश रुकता है और प्राकृतिक संसाधनों की शाश्वतता बढती है ।
  • शून्य लागत खर्च, ज्यादा ऊपज, उत्तम गुणवत्ता, अच्छी मांग, योग्य मूल्य ऐसे खेती से गाँव से शहर होनेवाला मानवी स्थलांतर रुक सकता है ।
  • इन सभी मुद्दों का विचार करते हुए देश के हर किसान ने जीरो बजट प्राकृतिक खेती एवं आध्यात्मिक खेती का स्वीकार करना चाहिए ।

सूचना: भाग सुनते समय आकृतियाँ (PDF) यहाँ पर देखिए ताकि विषय समझ में आए।

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